Anupama Ki Nai Shuruat - Anupama 18th September 2021 Review and Written Update EP 371

Anupama 18th September 2021 - Today's Episode 371 Review and Written Update in Hindi

अनुपमा ने किया कड़ा मुकाबला !!

क्या बा और क्या वनराज, सभी एक ही थाली के छत्ते बट्टे है। 

इतना किस चीज़ का घमंड है इन् लोगो को। 

अनुपमा के इतना समझाने पर भी इन लोगो  की सोच पर ज़रा भी फरक नहीं पड़ा। 

हर घर में लड़ाई झगडे होते है पर किसी के अच्छे होने का इतना भी फायदा नहीं उठाना चाहिए की वो इंसान अच्छाई करना ही छोड़ दे। 

बा ने ये कह कर की कभी किसी और के बारे में भी सोचा कर - अनुपमा के दिल एक गहरी चोट दी है। 
वनराज और काव्या से तो अनु को कोई उम्मीद ही नहीं है पर बा से तो थी। 

अपनी माँ माना है अनुपमा ने बा को और उनके लिए सिर्फ उनका बेटा ही हमेशा महान होता है। 

अगर वनराज अनुपमा के तीन बच्चो का बाप न होता तो इतनी बत्तमीज़ी पर एक करारा सा थप्पड़ तो बनता ही था। 
मेरे ही तरह आप लोगो की भी यही इच्छा होगी जानती हु। 

अनुपमा को तोड़ने की बा और वनराज ने पूरी कोशिश की पर बापूजी के आशीर्वाद और साथ की वजह से उसने सबका डटकर मुकाबला किया। 

Anupama Ki Nai Shuruat - Anupama 18th September 2021 Review and Written Update EP 371

समर और किंजल का साथ !!

जब बा की बातों ने अनु का दिल दुखाया और वनराज जैसे इंसान ने कीचड़ उछली तो अनु अंदर से टूट गई। 

अनुपमा को सँभालने के लिए समर और किंजल उसके पास मौजूद थे। 
दोनों हमेशा हर परिस्थिति में अपनी माँ का साथ निभाते है। 

सच में अनुपमा के साथ कितना भी बुरा हुआ है पर समर जैसा बेटा और किंजल जैसी बहु की वजह से आज वो अपने सपनों की तरफ उड़ने की सोच पा रही है। 

अनुपमा से खरी खोटी सुन कर भी उसके दिमाग में पता नहीं और क्या खिचड़ी पक रही है।  जिसका अंदाज़ा आप और मै क्या खुद काव्या भी नहीं लगा सकती। 

वनराज को सिर्फ परेशानी है तो अनुपमा का आगे बढ़ना। 

कोई भी आदमी अपनी पत्नी या एक्स पत्नी की खुद से ज़्यादा कामयाबी नहीं सहन कर सकता।  इस पुरुष प्रधान देश की सोच ही वनराज जैसी है। 
औरत सिर्फ घर की चार दीवारी में ही सही है, और खुद चाहे ऑफिस में कुछ भी करे पर अपनी पत्नी को किसी और के साथ बर्दाशत भी नहीं कर सकते। 

औरत जब तक बेचारी है दुखयारी है बहुत अच्छी लगती है , और और वही औरत खुद के लिए जीना चाहे तो सबके सीने में सांप लोट जाते है। 
 

अनुज और शायरी !!

अनुज की भी कैसी किस्मत है। 

जिससे प्यार किया उसे कभी जाता नहीं पाया और जब वो वापस  मिली है तो कुछ कह नहीं पा रहा। 

सिर्फ एक शायरी है जो उसके हर दर्द और चाहत को छुपा लेती है। 

अनु के आने की उम्मीद भले ही अनुज को न हो पर उसका दिल जनता है की अनु अनुज के साथ काम करने का ऑफर स्वीकारेगी चाहे फिर शर्त कुछ भी हो। 

अनुपमा की नई शुरुआत !!

अनुपमा ने घरवालों से कड़ा मुकाबला कर अपने आने वाले जीवन की शुरुआत कर दी है। 
जब बापूजी, किंजल और समर साथ है तो अनुपमा चट्टान से भी टकरा सकती है और ये तो लड़ाई उसने अपने जैसी दूसरी औरतो के लिए की है। 

अब अनूपमाँ के कदम नहीं रुकने वाले। 

अब बा नाराज़ हो तो हो। 
वनराज काव्या ताने मारे  तो मारे। 
तोषु गुस्सा करे तो करे। 

अपने दिल की बात सुनने लगी है अनुपमा।  नई साड़ी , डायरी और पेन कर लिए है रेडी। 

बस देरी है तो अनुज के साथ ऑफिस पहुंचने की जहा से होने वाली है अनुपमा के जीवन की नई शुरुआत। 
  


पढ़ने के लिए धन्यवाद्!

उमा धीमान
 

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