Anupama Written Update - Kya Hoga Anupama Ka Agla Padav - Maha Episode 384

अनुपमा रिव्यु और रिटेन अपडेट - अनुपमा का क्या होगा अगला कदम - टुडे महा एपिसोड 384 - 3 अक्टूबर 2021 

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अनुपमा को जलील करने की साज़िश 

दोस्तों अनुपमा ने शाह परिवार की इज़्ज़त बचाई है और राखी के बढ़ते नापाक कदमो को भी रोका है।  जहा सबको अनुपमा का एहसानमंद होना चाहिए था वही ये पैसे कहा से और क्यों दिए, जैसे सवालो की जैसे बौछार कर दी हो।

अनुपमा ने जब वनराज शाह की बात काटते हुए कहा की ये पैसे मुझे कंपनी से लोन के तौर पर मिले है और मेरी सैलरी में से या कारखाने की डील में से ये पैसा वसूल लिया जायेगा।

तब भी वनराज और लीला शाह, दोनों शक़ की नज़रो से अनुपमा और अनुज के रिश्ते को देख रहे है। अनुपमा ने सही कहा वनराज को की जब से हमारा तलाक हुआ है आप मेरी सास बन गए है वैसे भी 26 साल से ऐसे तानो की आदत हो चुकी है।

वनराज को कबसे ये आग लगी होती है की ये चेक अनुपमा के पास शुरू से था पर रास्ते भर उसने बताया तक नहीं। अनुपमा जवाब देती है की आपकी चिक चिक से बचने के लिए नहीं बताया वरना पूरा रास्ता यही बातें होती।

अनुपमा तो यहाँ तक कह देती है की अगर अनुज का अहसान नहीं लेना तो जाओ राखी से चेक वापस ले आओ।  तब वनराज की बोलती बंद हो जाती है। फिर अनुपमा और अनुज के साथ काम करने पर ऊँगली उठाते हुए कहता है की ये दोनों अब खूब मन लगा के काम करेंगे। अनुपमा भी बढ़िया सा जवाब देती है की ये आप के ऑफिस में होता था मेरे यहाँ नहीं।
 
बा से मुंबई बीच पर अनुपमा और अनुज के साथ में होने पर सवाल उठता है।  मगर अनुपमा  जलील करने की कोशिश यहाँ नाकामयाब हुई।

वनराज  की खुली पोल 

इतने में समर के फ़ोन में एक वीडियो आता है और वह बताता है कि यह उसके दोस्त ने भेजा है जिसमें अनुज फर्श पर लुढ़क कर नाच रहा है। वनराज मुँह बनाते हुए कहता हैं कि एक सस्ता आदमी ऐसी हरकत ही करेगा।
 
समर कहता है कि अनुज का सबसे अच्छा दोस्त भी उसके साथ नाच रहा है। बा बोलती है कि उसका दोस्त उसके जैसा ही होगा।

समर वीडियो सबको दिखाता है और कहता है आप लोग भी देख लो अनुज के सस्ते दोस्त को। वनराज की हंसी गायब हो जाती है। मामाजी कहते हैं कि उनका भतीजा दिल्ली के बारातियों की तरह क्यों नाच रहा है।
किंजल भी वनराज से पूछती है कि पापा क्या आप नशे में है। मामाजी मजाक करते हुए बा को कहते हैं की दीदी नशे में मतलब टुल्ल। बा आंखे दिखा कर कहती है कि वह सब जानती है।

अनुज को आया गुस्सा 

उधर अनुज घर लौटता है, जीके काका पूछते है कि वह इतनी जल्दी क्यों लौट आया। अनुज कहते हैं कि उन्होंने मीटिंग रद्द कर दी और अपने लिए चॉकलेट दूध लाने के लिए कहा। जीके काका पूछते है कि वह इतने  गुस्से में क्यों है।
 
अनुज अपना सामान इधर उधर फेकते हुए कहता है कि वनराज शाह ने मेरे सामने अनुपमा के साथ दुर्व्यवहार किया और घटिया बातें कीं, जिनको उसने चुपचाप सुना। 

वह उसको मुंह तोड़ जवाब दे सकता था पर यह अनुपमा के निजी जीवन की बात है और वह हस्तक्षेप नहीं कर सकता। अनुपमा की हुई बेइज्जती को देखकर उसका दिल टूट जाता है। 

वह कहता है कि ये सब उसकी वजह से है, काश की उसने अनुपमा  अपने दिल की बात बता दी होती तो आज अनुपमा को इतना सब सहना नहीं पड़ता।  पहले 26 साल पति के रूप में और अब एक्स बनकर, वनराज सिर्फ और सिर्फ अनुपमा को परेशान कर रहा है। 

अगर अनुपमा उसके जीवन में होती तो अनुपमा का जीवन एक परियो की कहानी जैसा होता क्योंकि वह एक रानी है जो एक राजकुमारी जीवन की हकदार थी, लेकिन उसकी गलती की वजह से उसकी ये हालत है।

बा के मन में मैल 

बा वनराज के कमरे में जाती है और वनराज से कहती है कि उसका मन बेचैन हो रहा है अनुज और अनुपमा को लेकर।

वह कहती है वैसे मुझे पता है की अनुपमा के मन में अनुज के लिए आज कुछ नहीं है, मगर बाद में कुछ हो गया तो; समर को बचाने से लेकर २० लाख  चेक तक, अनुज बार-बार उसकी मदद कर रहा है, जिससे जल्द ही वह उसके दिल में जगह बना ही लेगा।

वनराज की गलती ने उनका सिर झुका था, लेकिन अनुपमा से हुई गलती से तो उनका सिर ही कट जायेगा। वनराज गुस्से में कहता है कि वह ये सब बात अनुपमा को जाकर क्यों नहीं बताती, क्योंकि अनुपमा वनराज की एक नहीं मानती। 

बा कहती है कि वह कोनसा उसकी सुनती है। वनराज पूरी तरह से जल भून चूका है और चिल्लाता है कि क्या वह परिवार और बिज़नेस को छोड़, अनुपमा और अनुज को देख-देख कर मर जाये। कितना फनी डायलॉग था।
 

समर पर मंडरा रहा है खतरा 

उधर अनुपमा खाना बना रही होती है तभी किंजल वहा आकर पास में खड़ी हो  जाती है और अपनी माँ के नाटक के लिए माफी मांगती है। अनुपमा कहती है कि इसके बारे में कोई बात नहीं करनी। 

किंजल पूछती हैं चलो ये बताओ कि आपका मुंबई ट्रिप कैसा रहा। अनुपमा कहती है कि अच्छा था। किंजल पूछती है कि क्या सुबह की मीटिंग कैंसिल कर दी थी। अनुज ने कहा था कि वह सब संभाल लेगा, घर पर मुसीबत आ जाती अगर वह समय पर नहीं लौटती।

भगवान के आशीर्वाद और अनुज की मदद से सब कुछ ठीक हो गया। किंजल बोलती है मम्मी कुछ भी सही नहीं है और रोहन और नंदिनी की तस्वीरें दिखाती हैं कि रोहन ने समर और नंदिनी के जीवन को नरक बना रखा है।

वही समर और नंदिनी डांस अकादमी में जैसे ही पहुंचते हैं, रोहन के  गुंडे समर का गला घोंटने लगते है और रोहन नंदनी को पकड़ लेता है।  नंदिनी उसे और समर को छोड़ने की बार बार विनती करती है। 

अनुपमा किंजल से पूछती है कि उसने इस बारे में पहले क्यों नहीं बताया। किंजल कहती है कि मम्मी आप घर पर नहीं थे, और उसने इसके बारे में बा और बापूजी को भी नहीं बताया। 

अनुपमा किंजल से कहती है कि उसने सही किया। किंजल बोलती है कि रोहन नंदिनी को पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। इसलिए हमे कुछ करने की जरूरत है और उसे ये भी लगता है कि नंदिनी और समर दोनों की जान जोखिम में है। 

अनुपमा चिंतित होकर, सारी तस्वीरें जला देती है और कहती है कि वह नंदिनी के अतीत को उसका आज बर्बाद नहीं करने देगी। रोहन के गुंडे समर को बेरहमी से मार रहे होते है। 

नंदिनी रोहन से समर को बख्शने की विनती करती है। रोहन कहता है कि अगर वह उसे छोड़ देगा तो वह समर को छोड़ देगा वरना वह समर को मार डालेगा। समर को कुछ हो जाने पर नंदिनी उसे जान से मारने की चेतावनी देती है। समर ने गुंडों पर काबू पा लिया। रोहन ने उसे पीछे से लोहे की रॉड से मारा।

समर की चिंता में अनुपमा डांस एकेडमी में पहुँचती है और समर और नंदिनी को वहां देखकर खुश होती है। वह कहती है कि किंजल ने उसे रोहन के बारे में सब बता दिया है। 

अनुपमा कहती है कि एक बार तुम लोगो की सगाई हो जाये तो रोहन कुछ नहीं कर पायेगा, वह घर जाकर जल्द ही सगाई करने के लिए कहेगी। अनुपमा कहती है कि उसने और किंजल ने ही उन तस्वीरों को देखा है और उसे जला भी दिया। 

अनुपमा कहती है हम सब रोहन को ऐसा दिखाएंगे की जैसे परिवार वालो को तस्वीरों से हमे कोई फरक नहीं पड़ता और उन्हें चिंता न करने के लिए कहती है क्योंकि उनकी माँ उनके साथ है। 

समर ने हाँ में सिर हिलाया। अनुपमा के जाने के बाद, समर भगवान का शुक्रिया अदा करता है कि उसे कोई बाहरी चोट नहीं लगी। नंदिनी पूछती है कि लेकिन आंतरिक चोटों का क्या। समर कहता है कि रोहन नहीं बदलेगा अगर वे आज की घटना के बारे में मम्मी को बताएंगे, तो मम्मी और अधिक तनाव में आ जाएंगी, इसलिए वे इसे अपने तरीके से संभाल लेंगे और जब वे बाहर हों तो सावधान रहें। 

नंदनी को अकेले बाहर नहीं जाना चाहिए। नंदिनी उसे रोहन की धमकी याद दिलाती है। समर का कहना है कि मम्मी ने बताया कि हमारा डर ही सामने वाले का हथियार बन जाता है। तो हमे डरना नहीं है।

बा की उलझन

बा को राखी के दिए ताने याद आते है। बापूजी आकर लीला को उसकी माँ का हार देते हुए कहते हैं कि अनुपमा ने इसे पहले की तरह ठीक कर दिया है। बा कहती हैं कि टूटने के बाद कुछ भी पहले जैसा नहीं रहता, चाहे हार हो या रिश्ते। 

बापूजी कहते हैं कि अगर चीजों को सही से ठीक करना जानते हो तो वे और मजबूत हो जाते हैं। बा कहती हैं कि बार-बार जोड़ने से धागे में  गाँठे पड़ जाती है। बापूजी वहा से चले जाते है।

अनुपमा के जीवन में नया पड़ाव 

बापूजी को एक कॉल आता है और बात करते हुए घर से बाहर चले  जाते है। वह फिर अनुपमा को फोन करते है और उसे कुछ बताते है।अनुपमा आनन-फानन में एकेडमी से निकल जाती है। वनराज कबसे अनुपमा पर नज़र गड़ाए रहता है और सोचता है कि वह जरूर अनुज से मिलने गई होगी।

जल्दी से जाके समर से पूछता है कि अचानक से उसकी माँ कहाँ गई है। समर कहता है कि वह नहीं जानता। वनराज उससे पता लगाने के लिए कहता है। समर पूछता है कि क्या वह ये जानना चाहता है कि क्या मम्मी अनुज से मिलने गई है। वनराज वहा से चुप चाप चला जाता है।

अनुपमा जल्दी से अनुज के घर पहुंचती है और देखती है कि बापूजी तो  ठीक है और जीके काका के साथ शतरंज खेल रहे है। अनुपमा गुस्सा हो जाती है की ऐसा कोन करता है। बापूजी कहते हैं कि वह उसे एक सरप्राइज देना चाहते हैं। 

अनुज अनुपमा को ले जाकर टेबल पर रखे अपने होटल का भूमि पूजन आमंत्रण कार्ड दिखाता है। अनुपमा धीरे धीरे आगे बढ़ते हुए कार्ड उठाती है और उसे याद आता है कि कैसे पाखी का पहला जन्मदिन बिना उसके नाम के निमंत्रण कार्ड के साथ मनाया गया था। 

मेजबान के रूप में कार्ड पर अपना और अनुज का नाम देखकर वह भावुक हो जाती है और बापूजी को दिखाती है। अनुज कहता हैं कि यह कोई बड़ी बात नहीं है। अनुपमा बताती है कि यह केवल एक महिला ही समझ सकती है कि यह कितनी बड़ी बात है, कोई भी महिला की नेमप्लेट दरवाजे पर नहीं लगाती, कोई उसके नाम से उसे नहीं जनता।

बापूजी और जीके काका के पैर छू कर आशीर्वाद लेती है। अनुज कहता हैं लेटस रॉक पार्टनर। अनुपमा यह खुशखबरी बा और बच्चों को सुनाना चाहती है। जीके काका कहते है कि पहले उन्हें मिठाई खिलानी चाहिए और फिर वह अपने परिवार को बताये। 

अनुपमा कहती है कि वह बा की पसंदीदा मिठाई तैयार करेगी। अनुज कहता है कि वे दोनों इसे तैयार करेंगे। अनुज उसे अपने पूरे परिवार को आमंत्रित करने के लिए कहता है। वह कहती है चलो खाना बनाना शुरू करें क्योंकि उसे जल्द ही घर लौटना है। वह खाना बनाने में उसकी मदद करता है। तुम ही हमारी हो मंजिल माई लव.. बैकग्राउंड में गाना बज रहा है।

घर में बा वनराज को उकसाने लगती है कि अनुपमा हो ना हो अनुज से ही मिलने गई होगी। वनराज का गुस्सा और बढ़ जाता है और अनुपमा के लौटने का इंतजार करने लगता है। 

इतने में काव्या भी मुंबई से लौट आती है और घर लौटते समय आई कठिनाइयों के बारे में चर्चा करती है। वनराज की आँखे दरवाजे पर होती है। काव्या पूछती है कि क्या अनुपमा बहार गई है और तुम्हे  लग रहा है की वह अनुज के घर गई है। वनराज हाँ कह देता है। 

काव्या भी गुस्सा हो जाती है की वह अनुपमा के बारे में परेशान है, न कि उसके लिए जो अकेले घर गई है। काव्या कहती है उसने शादी करके गलती करदी, वह जब प्रेमिका के रूप में ही बेहतर थी। 

वनराज सोचता है कि काव्या सही तो कह रही है, अनुपमा क्या करती है और किससे मिलती है, वह क्यों परेशान हो रहा है। दूसरे ही पल वापस सोचता है कि आखिर अनुपमा गई कहाँ?

वह पहले की तरह मुख्य दरवाजे के सामने कुर्सी लगा कर बैठ जाता है और उसकी प्रतीक्षा करता है। अनुपमा घर लौटती है और पिछली घटना को याद करके वनराज को नज़रअंदाज़ करने की कोशिश करती है। 

वनराज उसे रोकता है और पूछता है कि वह कहाँ थी। वह कहती है कि वह जहां सोच रहे है, अनुज के घर। वह कहता है कि माना वह और काव्या गलत थे लेकिन उन्होंने घर के बड़ों का सम्मान किया और कोई बेशर्मी नहीं की। 

वनराज अनुपमा को बेशर्म कहता है कि वह अनुज के घर पर अकेली गई थी। इतने में बापूजी आ जाते हैं और कहते हैं कि वह उसे वहाँ ले गए थे।

वनराज पूछता है लेकिन क्यों। बापूजी कहते हैं इस देश में अब भी बाप बेटे से सवाल करता है बेटा बाप से नहीं। 

बापूजी थाली बजाकर सभी को खुशखबरी देने के लिए बुलाते है। बा, समर, किंजल,काव्या, मामाजी  पाखी आ पहुँचते है और पूछते कि क्या हुआ। अनुपमा बा के पास जाकर भूमि पूजन का कार्ड दिखाती है, बा आप गुस्सा जरूर है, लेकिन मैंने ऐसा कुछ नहीं किया जो आप को अपमानित करे। 

यह उसके नए काम की शुरुआत है और वह चाहती है कि उसका पूरा परिवार वहां मौजूद रहे। बा अनुपमा के हाथ में हलवे को सूंघ लेती है  और पूछती है कि उसने इसे कहाँ बनाया है। 
बापूजी कहते हैं अनुज के घर और वह उसे वहाँ ले गए थे। बा अनुपमा को ताना मारती है कि तुझे किसी  पराये मर्द के घर में खाना बनाना अच्छा लगता होगा, लेकिन मैं यह नहीं खाउंगी।

देखते है क्या होने वाला है अनुपमा के आने वाले जीवन में.....कैसी होगी अनुपमा के जीवन की नई शुरआत ?  

पढ़ने के लिए धन्यवाद् !!

उमा धीमान

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