Anupama Written Update 12th October 2021 - Kya Vanraj Me Aayega Badlav EP 393

अनुपमा रिटेन अपडेट 12 अक्टूबर 2021 हिंदी में - क्या वनराज में आएगा बदलाव, क्या फिर एक हो जायेंगे वनराज - अनुपमा!

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वनराज गुस्से से भड़का हुआ है और काव्या से कहता है कि ये नौकरी उसे नीचा दिखाने के लिए दी गई है। काव्या हसकर पूछती है कि क्या अनुज वनराज को सिर्फ नीचा दिखाने के लिए इतना खर्च करेगा, अगर वह वनराज के पास से निकल जाये वो भी बहुत है।  वनराज काव्या पर चिल्लाता है। 

काव्या कहती हैं कि सोचने वाली यह बात है की अनुज जैसा इंसान जिसके पास इतना बड़ा बिसनेस है वह 24 घंटे तुम्हारे बारे में क्यों सोचेगा।  जबकि मैं तुम्हारी पत्नी होते हुए तुम्हारे बारे में 24 घंटे नहीं सोच सकती। काव्या यहाँ तक कह देती है की वनराज को डॉक्टर को दिखाने की आवश्यकता है। 

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वनराज अपने गुस्से पर काबू नहीं रख पता और अपना हाथ टेबल पर रखे फूलदान से टकरा देता है। चोट लगने के कारण खून बहने लगता है। काव्या  कहती है की वह ऐसी हरकत क्यों कर रहा है। बा किंजल को फर्स्ट ऐड बॉक्स लाने भेजती है। इतने में अनुपमा वनराज का हाथ जग में रखे पानी में डाल देती है। 

अनुपमा बोलती है की अगर आप ऐसा करेंगे तो काव्या को सही साबित कर देंगे। काव्या रुमाल लेकर आती है, वनराज अपना हाथ पीछे खींच लेता है और उससे कहता है की जाकर अनुज को ये रुमाल बांध दे क्योंकि उसने  उसका जीवन तो बर्बाद कर ही दिया है।

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अनुपमा वनराज से पूछता है कि वह हमेशा अपनी गलतियों के लिए दूसरों को क्यों दोष देता है।  अनुज ने अगर काव्या को अच्छी नौकरी दे दी तो आपका जीवन कैसे बर्बाद हो गया। काव्या वनराज को विक्टिम कार्ड खेलने से रोकती है और कहती है कि उसे ऐसा क्यों लगता है की हर कोई उसके खिलाफ साजिश कर रहा है। 

अनुपमा कहती हैं कि आपको अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। काव्या ने अनुज और मेरे साथ जुड़कर सही किया है। वनराज दोनों की बातें सुन कर चौंक जाता है और कहता है वाह अब तुम दोनों एक टीम बन गए हो। काव्या वनराज के हाथ पर पट्टी बांधने आती है तो वनराज उसे अपने से दूर रहने की चेतावनी देता हैं।

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काव्या अनुपमा से प्राथमिक उपचार के लिए कहती है। अनुपमा कहती है की एक बार पट्टी बंधवा लीजिये फिर आपको कोई परेशान नहीं करेगा। वनराज अनुपमा से हाथ छुड़ाने के चक्कर में उसे धक्का दे देता है। अनुपमा गिरती है, लेकिन काव्या उसे संभाल लेती है।

पाखी यह देख अपने कमरे की तरफ जाने लगती है की उसका बॅलन्स बिगड़ जाता है और वह सीढ़ियों से लुढ़क कर गिर जाती है। सभी लोग जल्दी से पाखी को उठाने दौड़ते है। अनुपमा और वनराज अपना झगड़ा छोड़ कर उसको  है की कहीं चोट तो नहीं लगी। दोनों भगवान को धन्यवाद देते हैं कि उसे कोई चोट नहीं आई है।

पाखी अपने मम्मी पापा से कहती है की उसको दिल पर चोट लगी है, उसका दर्द कोई नहीं समझ सकता। आप लोगो में लड़ने की ताकत कहा से आती है। वह घर में सबसे पूछती है की सब लोग हमेशा क्यों लड़ते हो।  बा, बापूजी, मामाजी और किंजल भी लड़ते-लड़ते नहीं थकते। वह परिवार के सभी लोगो को लड़ते देख थक चुकी है।  उसे सबसे ज्यादा दुख तब होता है जब उसके माता-पिता आपस में झगड़ते हैं। 

वनराज का कहता है कि बेटा ऐसे बात नहीं करते। वह पूछती है कि फिर आप मम्मी के लिए अपमानजनक तरीके से बात क्यों करते हो ? आप मेरे हीरो हो जो हमेशा ये ध्यान रखते थे की मैं कहीं से कुछ बुरा ना सीख जाऊ और अब वे दोनों खुद उसे गलत चीज़े सिखा रहे हैं। पाखी कहती है की तलाक लेने से पहले और उसके बाद भी आप दोनों लड़ रहे हैं। 

वह अपनी मम्मी और पापा को एक दूसरे को समझने और एक दूसरे के जीवन में दखल ना देने के लिए कहती है।  वह आस पास खड़े सही लोगो से रोज़ रोज़ लड़ाइयों को बंद करने की रिक्वेस्ट करती है।  पाखी कहती है की जब मम्मी पापा एक दूसरे से परेशान हो तो तलाक ले सकते है लेकिन जब एक बच्चा अपने मम्मी पापा के झड़गो से परेशान हो जाये तो वह क्या करे ?

काव्या को लगता है कि इस घर में हमेशा कोई ना कोई नाटक करता रहेगा, धन्यवाद भगवान जी का कि मुझे नौकरी मिल गई और वह कम से कम 10 घंटे इस घर से दूर रह सकती है। अनुपमा और वनराज को अपनी गलतियों का एहसास होता है और वे पाखी से माफी मांगते हैं और कहते हैं कि सब कुछ उलझ गया है और हम इसे सुलझाने की कोशिश करेंगे। 

पाखी कहती है कि वह जानती है की सब ख़राब हो रहा है लेकिन हम कोशिश तो कर ही सकते है। वे दोनों भी हाँ में सिर हिलाते हैं। पाखी अपना फ़ोन निकलकर कहती है कि चलो एक रोतडू सेल्फी लेते हैं। वनराज अनुपमा के कंधे पे हाथ रख वो तीनो सेल्फी क्लिक करते हैं। वह फोटो दिखाते हुए कहती है कि उन्होंने जो वादा किया है यह तस्वीर उसका सबूत है। 

अनुज ने सोशल मीडिया में पाखी की अपने मम्मी पापा के साथ क्लिक करी सेल्फी देख लेता है और पाखी के शब्दों को याद करता है कि वह अपने मम्मी पापा और परिवार से कितना प्यार करती है। उन्हें किसी भी हाल में अलग होते हुए नहीं देख सकती। वनराज अनुपमा के पास जाता है और कहता है कि पाखी सही तो कह रही है। उसके घर का पूरा माहोल बदल गया है, वह जब भी लड़ता था तो खुद पर गुस्सा आता था, लेकिन पाखी की बात सुनकर उसे खुद पर शर्म आ रही है।  

बापूजी और बा भी अपने रिश्ते सुलझाने की कोशिश करते है। उधर अनुपमा वनराज से कहती है कि अब स्थिति सही और गलत से परे हो गई है। अब यह उनके बच्चों के बारे में है। वे स्वार्थी हो गए थे। वह कहती है की मैं सिर्फ सफल होना चाहती हु। वनराज कहता है कि वह उसे रोकना चाहता था। वह कहती हैं कि स्वाभिमान के लिए लड़ाई लड़ी। उसका कहना है कि उन्होंने अपमान के लिए लड़ाई लड़ी। अनुपमा वनराज को स्वीटी के पापा कहती है। दोनों याद करते है कि समर और पाखी जब भी उन्हें तोषु के पापा बुलाते थी , वे दोनों कितना लड़ते थे। अब भले ही वे एक-दूसरे के कुछ नहीं है लेकिन अपने बच्चों के माता-पिता तो हमेशा रहेंगे। 

अनुपमा वनराज को अपने गुस्से पर काबू रखने के लिए कहती है और शांत दिमाग से कैफे चलाने के लिए बोलती है।  वह कहती है की काव्या का ढोलकिया के साथ काम करने से तो अच्छा है की वह उसके और अनुज के साथ काम करे। वनराज को समझाती है की उसे अपने टूटे हुए रिश्ते से कुछ भी उम्मीद नहीं करनी चाहिए। तोशु उनकी लड़ाई के कारण दूर रह रहा है और स्वीटी भी इससे थक चुकी है, उन्हें यह सब खत्म कर देना चाहिए। 

अगले दिन अनुपमा अनुज के ऑफिस पहुँचती है और आंसू भरी आँखों से माफी माँगती है। कल रात जो हुआ उसकी वजह से वह अब उसके साथ काम नहीं कर पायेगी। क्योकि बच्चों की खुशियों से समझौता नहीं करेगी। 

देखते है दोस्तों क्या होता है अनुपमा के अगले एपिसोड में !

क्या अनुपमा और अनुज हो जाएंगे जुदा ?

रॉक एन रोल के साथ बने रहने के लिए धन्यवाद् ! 

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