Ghum hai kisikey pyaar mein 25 October 2021 Written Update - Sonali Ko Bhavani Ne Dandit Kiya

Ghum Hai Kisikey Pyaar Mein 25 October 2021 written update - Sonali Ko Bhavani Ne Dandit Kiya

पिछले एपिसोड में हमने देखा की अश्विनी के विराट और साईं को अलग काम में रहने के फैसले पर निनाद और भवानी उसको सवाल करते है। और फिर आखिर कार सब को अश्विनी की बात माननी पड़ती है।

तभी पाखी सबी को बताती है की विराट और साईं एक कामरे में साथ रह कर भी अलग सोते थे, ये बात सुनते ही सब हैरान रह जाते हैं।

अश्विनी साईं को कमरे में आराम करने को कहती है और भवानी सभी को महाभोजन की तयारी करने को कहती है।

सोनाली ताना मरते हुए कहती हैं की साईं को भी काम करना चाहिए, ये सुन्ते ही भवानी सोनाली को काम करने के लिए कहती है।

सोनाली और ओंकार इस से बचने के लिए बहाना बनाने लगते हैं, लेकिन भवानी किसी की नहीं सुनती और सोनाली को काम करना पड़ता है।

वहीँ साईं और विराट अपने अपने कमरे में है, विराट को कामरे में साई की याद सतती है, वहीँ दसरी ओर साईं को विराट की बातें याद आती हैं, अब आगे

गुम है किसी के प्यार में 25 अक्टूबर 2021 रिटन अपडेट - सोनाली को भवानी ने दंडित किया

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एपिसोड की शुरुआत में, सोनाली मसाले पीस रही होती है और ओंकार वहाँ बैठें उसे देखता है। वह रोती है कि भवानी ने उसे साईं की वजह से दंडित किया।

सोनाली कहती है कि ओंकार ने वहाँ एक शब्द भी नहीं कहा। ओंकार बोलता हैं कि उसने कोशिश की थी। सोनाली कहती है कि घर के सभी बड़ो के साथ साथ छोटो के सामने भी उसका अपमान किया गया हैं।

उसी समय साई वहाँ पर आती है और पूछती है कि क्या वह उसकी मदद कर सकती है। सोनाली कहती है कि अगर वह कुछ करती है तो दूसरे आ कर उसे गलत कहेंगे।

साईं सोनाली का हाथ पकड़ कर उसे काम करने से रोकने की कोशिश करती है, लेकिन वह अपना हाथ छुड़ाने के चक्कर में उसे धक्का देती है। साई गिरने ही वाली होती है की भवानी उसे गिरने से बचा लेती है।

भवानी साईं को धक्का देने के लिए सोनाली को फटकार लगाती हैं। साईं उन्हें बताती है कि सोनाली बस उसका हाथ हटा रही थी। भवानी कहती है कि सोनाली जानती थी कि साईं कमजोर है, फिर भी, उसने उसे धक्का दिया। अश्विनी साईं को बैठाती है।

पाखी को लगता है कि साईं के नाटक फिर से शुरू हो गए हैं। साई कहती है कि वह सोनाली की मदद करेगी।

भवानी कहती है कि सोनाली को वह काम अकेले ही करना हैं, कोई और उसकी मद्दद नहीं करेगा, वर्णा यह उसके आदेशों की अवहेलना होगी। वह सोनाली से कहती है कि जब तक वह सारे मसाले पीस न ले तब तक जगह से न उठे।

सोनाली के मसाला पीसते ही भवानी और अदरक डाल पीसने के लिए डाल देती है। भवानी याद दिलाती है कि उसने भी साईं के साथ ऐसा ही किया था। सोनाली कहती है कि वह साईं के खिलाफ अकेली नहीं थीं, बल्कि भवानी और पाखी ने भी ऐसा ही किया था।

पाखी सोचती है कि क्या होगा अगर उसे भी सजा मिले।

ओंकार कहता है कि साईं अब सबकी चहेती बन गयी है, इसलिए सोनाली को सजा मिल रही है। निनाद कहते हैं कि हर कोई अपने हिस्से का काम कर रहा है, इसलिए सोनाली को भी कुछ काम मिल गया।

मानसी कहती है कि उसे समझ में नहीं आता कि मामला क्या है। ओंकार कहता हैं कि सभी को ओंकार और सोनाली की जगह पर रह कर सोचना चाहिए, ताकि सब उनको भी समझ सके।

साई कहती हैं कि निनाद और मानसी का मतलब कुछ भी गलत नहीं था। ओंकार साई से कहता हैं कि वह उनके परिवार के मामलों में हस्तक्षेप न करें।

इस पर शिवानी कहती है कि यह परिवार भी साईं का है। ओंकार साईं से बदतमीजी से बात करता है। निनाद उससे कहता है कि साई उसकी बहु है और कोई उस से असभ्य तरीके से बात नहीं करेगा, और साई वास्तव में इस परिवार का हिस्सा है।

ओंकार कहता है कि साईं की वजह से ही यह परिवार टूटेगा और भवानी ने सोनाली को साई की वजह से सजा दी हैं। गुस्से में सोनाली साईं को अनाथ कहती है और कहती है कि यह अच्छी बात है कि उसके पिता नहीं रहे। ऐसी बात सुन कर हर कोई हैरान हो जाता है।

साई बहुत दुःखी हो जाती है और वहाँ से जाने के लिए उठती है लेकिन सम्राट उसे रोक लेता है।

सम्राट कहता है कि साईं एक अनाथ नहीं है और वह उसका बड़ा भाई है। मोहित भी कहता है कि वह साईं का छोटा भाई है और दो भाइयों के होते हुए साई अनाथ कैसे हो सकती है।

तभी विराट भी वहाँ पर आ जाता है और कहता है कि वह हमेशा साईं के साथ खड़ा रहेगा। अश्विनी कहती है कि वह साईं की माँ है, भवानी कहती है कि वह भी साईं के साथ उसकी चाची के रूप में है।

निनाद कहता है कि वह साईं के पिता हैं और कोई भी उसे जीवित रहने तक अनाथ नहीं कह सकता।

शिवानी कहती है कि वह साईं की बुआ है, भले ही वह साईं से छोटी दिखती है। अंत में देवी कहती है कि वह साईं की बड़ी बहन है और वे सभी उसके परिवार हैं।

ओंकार, सोनाली, करिश्मा और पाखी को छोड़कर सभी साईं के बगल में खड़े हो जाते हैं। सोनाली और ओंकार अपमानित महसूस करते हैं। उसी वक़्त सनी और पुलकित वहाँ पूजा के लिए आते हैं, और पाखी की माँ भी वहाँ पर आती हैं।

वैशाली भवानी से कहती है कि खाने में अच्छी महक आ रही है। भवानी उसे बताती है कि हर कोई महाभोज की तैयारी कर रहा है।

सोनाली गुस्से में फिर से मसाला पीसने लगती है और उसकी उंगली में चोट लग जाती है जिस से उसे बहुत दर्द होता है। पाखी उसकी उंगली पर हल्दी लगाकर पट्टी बांधती है।

भवानी को याद आता है कि जब साईं को चोट लगी तो पाखी ने कहा था कि वह जल्दबाजी कर रही है। भवानी पाखी को बचा हुआ मसाला पीसने के लिए कहती हैं।

पाखी कहती है कि उसके पास करने के लिए बहुत काम है, उप्पर से उसे और सम्राट को भी आरती करनी है। भवानी कहती है कि साई को ठीक होने में मदद करने के लिए आज की आरती साई और विराट करेंगे।

एपिसोड समाप्त

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