Anupama Written Update - Vanraj Ne Ki Anuj Ki Insult EP 386

अनुपमा रिव्यु एंड रिटेन अपडेट हिंदी में 5 अक्टूबर 2021 - क्या वनराज बर्बाद करेगा अनुपमा का सबसे बड़ा दिन टुडे एपिसोड 386

Anupama-Written-Update-Vanraj-Ne-Ki-Anuj-Ki-Insult-EP-386

अनुपमा का शुभ दिन 

दोस्तों ऐसा लगता है की वनराज, काव्या और बा ने अनुपमा के हर शुभ काम में विघ्न डालना बहुत बहुत जरुरी होता है इसिलए तो मुँह उठा के पहुंच गए भूमि पूजन में ताकि अनुपमा की खुशियों को बर्बाद कर सके। 

अनुपमा का भाई जिग्नेश भी अपनी बहन की खुशियों में शामिल होने के लिए पहुँचता है। अनुपमा और अनुज भूमि पूजन में एक साथ पूजा कर रहे है। 

वनराज को ये देख कर गुस्सा आता है और वह अनुपमा के ठीक सामने बैठ कर उसे घूरता है। बापू जी ने बा को पूछा कि अब क्यों आए हो? तो बा कहती है कि वनराज ने उसे यहां आने के लिए कहा। 

बापू जी ने बा को कहते है कि अगर वनराज ने सबके सामने कोई सीन क्रिएट किया तो वे भी चुप नहीं बैठेंगे। पूजा दौरान पंडित जी अनुपमा और अनुज को अपने हाथों की छाप एक कागज के टुकड़े पर छापने के लिए कहते हैं।

रिलेटेड - एक रंग में अनुज-अनुपमा 

वनराज पूरी तरह से जल गया  

नराज के उप्पर वह कागज उड़ कर अनुज और अनुपमा के हाथ की छाप उसके शर्ट पर आ जाती है, गुस्से में वह उनकी छाप को हटाने कोशिश करता है पर वो नहीं जाती। वनराज किस हद तक जल रहा था उसके चेहरे और हाव भाव से साफ़ पता चल रहा है। 

पूजा संपन्न होती है पंडित जी अनुज और अनुपमा को आरती और प्रसाद देने के लिए कहते है।अनुपमा का भाई भावेश अनुज से मिलकर बहुत खुश होता है और अनुज के व्यवहार की प्रशंसा भी करता है। 

काव्या बार बार वनराज को चुप रहने के लिए कहती है क्योंकि कोई भी प्रतिक्रिया दिखाने के लिए यह सही जगह नहीं है। जब अनुज और अनुपमा वनराज को प्रसाद देने आते है वह नहीं लेता अनुपमा तभी समझ जाती है कि वनराज यहां पूजा में शामिल होने नहीं बल्कि तमाशा करने आया हैं। 

अनुपमा आरती का थाल हाथ में लिए वनराज से कहती कि जो बोलने आया है तो तहज़ीब और तमीज का ध्यान रखे, अपनी बातों से किसी को ठेस न पहुंचाए। वनराज अपनी जेब में हाथ डालता है तभी अचानक प्रेस वाले आ पहुँचते है। 

उधर बापू जी भी बा को दुबारा समझाते है की वनराज को रोके यहाँ जो करने आया ही वो ना करे। बा सुनने के बजाये बापूजी पर ही बरस पड़ती है कि जब आप अनुपमा को नहीं रोकते तो मैं मेरे बेटे को क्यों रोकू ? अनुपमा गलत कर रही है। और वनराज सही। 

प्रेस के पत्रकार अनुज और अनुपमा का इंटरव्यू लेते है उधर काव्या के गुस्से से डरी हुई है की कहीं वनराज यहाँ सबके सामने कोई नया बखेड़ा न करे क्योकि उसे अनुज से बना कर रखनी है। अनुज पत्रकारों से कहता है की अब सारे सवाल अनुपमा जी से करे, अनुपमा पहले घबराती है फिर अच्छे से इंटरव्यू देने लग जाती है समर , नंदनी, किंजल  बापूजी अनुपमा को देखकर खुश थे। 

पाखी और अनुज की हुई दोस्ती 

अनुज पानी पी रहा होता है और देखता है पाखी अकेले कुछ घबराई सी खड़ी है। अनुज पूछता है की क्या हुआ? पाखी पहले कुछ नहीं बोलती, अनुज वापस बोलता है की वो जो सोच रही है उससे शेयर कर सकती है। 

पाखी पूछती है क्या अनुज अब भी उसकी मम्मी से प्यार करता है? अनुज कोई जवाब नहीं देता। पाखी कहती है कि अनुज बहुत अच्छे है लेकिन वह अपने माता-पिता को अलग होते हुए नहीं देख सकती और वो खुश है की उसके माता-पिता आज भी एक ही छत के निचे रहते है। 

अनुज पाखी की बातों और भावनाओ का सम्मान करता है और कहता है कि उसका ये सोचन गलत नहीं है बल्कि एक सामान्य बात है। अनुज पाखी से कहता है कि वह सिर्फ अनुपमा का दोस्त है और कुछ नहीं। अनुज पाखी से प्रॉमिस करता है उसके और उसकी मां के बीच अनुज की दोस्ती नहीं आएगी पर एक शर्त पर की वह अपनी माँ पर शक ना करे। 

पाखी से अपनी और अनुपमा की दोस्ती को भी समझने के लिए कहता है। अनुज और पाखी दोस्त बन जाते है। अनुज और पाखी को एक साथ हस्ता देख वनराज गुस्सा हो जाता है और पाखी को  अपने पास बुला लेता है। प्रेस के पत्रकारों ने अनुपमा का इंटरव्यू पूरा किया और वहां से चले जाते है।

शुरू हुआ वनराज का तमाशा 

अब अनुपमा- अनुज और वनराज-काव्या आ जाते है आमने सामने। वनराज गुस्से से भरा ही होता है और वह अनुज की कंपनी का एक लिफाफा दिखाते हुए कहता है की ये क्या है। अनुज पहले समझ नहीं पता, थोड़ी देर में उससे याद आता है की उनकी कंपनी के निर्णयकर्ताओं ने वनराज और काव्या के प्रपोज़ल को मुनाफे वाला पाया और विचार विमर्श करके उन्होंने ही यह भेजा है। 

वनराज को इस लेटर में अपनी बेज्जती महसूस हो रही है इसिलए वो ये लेटर लेकर यहाँ आया है ताकि अनुज को सबके सामने जलील कर सके। वनराज अनुज और अनुपमा को आँखे दिखता हुआ कहता है की उसके साथ ये गलत किया है। उसे कोई एहसान या भीख नहीं चाहिए। 

अनुज को आज पहली बार गुस्से में देखा। अनुज कहता है की अगर इतनी दिक्कत थी तो प्रपोजल देने वो उसके ऑफिस आया ही क्यों था।  किसी को जब बिज़नेस आईडिया पर इन्वेस्टर मिलता है तो वो उसको धन्यवाद् कहता है न की उसकी इंसल्ट करता है। 

अनुपमा वनराज को ये सारी बातें ऑफिस में करने के लिए कहती है पर गुस्से ये पागल हुआ वनराज कहाँ सुनने वाला था।  वह कहता है जब सब कुछ खुलम खुल्ला हो रहा है तो बात करने में क्या दिक्कत है। अनुज वनराज पर चिल्लाता है और उसे चुप रहने के लिए कहता है। वनराज कहता है कि अनुज ने यह प्रस्ताव उसे इसलिए दिया है ताकि वह अनुपमा के साथ जो चाहे कर सकता है और कोई कुछ न बोले अनुज और अनुपमा दोनों एक साथ मिस्टर शाह कह कर चिल्लाते है। वनराज ये देख कर और चिल्लाकर कहता है की जो मैंने कहा वो प्रूफ हो गया।

देखते है दोस्तों कैसा रहेगा कल का एपिसोड, आपको क्या लगता है वनराज  किये की सजा मिलेगी या अनुपमा के शुभ दिन में लगेगा कलंक।   

पढ़ने के लिए धन्यवाद् !!

उमा धीमान 

Post a Comment

Previous Post Next Post