Anupama 4 November 2021 Written Update - Kavya Ne Chali Shah House Hathyane Ki Chaal

अनुपमा सीरियल अपडेट

अनुपमा 4 नवंबर 2021 रिटन अपडेट - काव्या ने चली शाह हाउस हथियाने की चाल

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Anupama 4 November 2021 Written Update - Kavya Ne Chali Shah House Hathyane Ki Chaal

अब तक हमने देखा की कैसे बा और काव्य ने मिल कर अनुपमा का हक्क भी उससे छीन लिया, सड़क पर ही अनुपमा से घर के कागज़ात बा के नाम करवा लिया। 

बापूजी इस बारे में जान कर बा से और वनराज काव्य से बहुत नाराज़ है, लेकिन इन् तीनो में से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। 

इन त्रिमूर्ति दुष्टो की हरकतों का फर्क तो अब अनुपमा को भी नहीं पड़ता, इस लिए वह अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए अनुज के साथ अपने लिए भाड़े का मकान देखने जाती है और किस्मत से उसे धनतेरस के दिन ही उसकी पसंद का घर मिल जाता है, अब आगे.. 

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आज के एपिसोड की शुरुवात में हमने देखा की कैसे अनुपमा और अनुज बहुत खुश है क्यूंकि अनुपमा को उसके पसंद का घर मिल गया है और अब इस घर से उसे कोई सिंगल होने के लिए जाने को नहीं कहेगा। 

इस ख़ुशी के अवसर पर अनुज अनुपमा को एक कीचेन भेट करता है जिस पर अनुपमा लिखा होता है, भेट मिलते ही अनुपमा की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता और फिर अनुज घर की चाबी उस कीचेन में लगा कर अनुपमा को देता है। 

वहीँ दूसरी तरफ, बापूजी बा पर बहुत क्रोधित होते है और उनसे पूछते है की उन्होंने उनकी बेटी का हक्क कैसे छिना, इस पर बा आग बबूला होते हुए कहती है की उसने जो किया ठीक किया और यह घर पे हक्क उनका होता है जो यहाँ रहते है, घर छोड़ कर जाने वालों का नहीं। 

और मैंने उससे घर का हिस्सा वापस ले कर कोई गलती नहीं की है, बल्कि गलती तो अनुपमा की है। मौके का फायदा उठाते हुए काव्य मगरमछ के आँसू बहाना शुरू कर देती है और बापूजी से कहती है की वो इस घर की बहु है और उसे उसका अधिकार मिलना चाहिए। 

उसे भी एक मौका मिलना चाहिए तब वह भी दिखा देगी की वो भी घर का और पुरे परिवार का अच्छे से ख्याल रख सकती है क्यों की अब वह ही इस घर की लक्मी भी है और साथ ही अन्नपूर्णा भी।

इस पर रही सही कसर वनराज पूरी कर देता है, वह कहता है की अनुपमा के पास तो अच्छी नौकरी है, घर है, अनुज है, वहीं काव्य के पास नौकरी नहीं है और उसका बिज़नेस भी कुछ ख़ास नहीं चलता तो उन्हें थोड़ा प्रैक्टिकल हो कर भी सोचना चाहिए और घर का हिस्सा अपने पास ही रखना चाहिए। 

भाई मौके का फायदा उठाना तो कोई काव्य वनराज से सीखे - क्या चाल चली है दोनों ने। 

इसके बाद बा भी बापूजी को कहती है की उसने हमेशा अनुपमा को बहु और बेटी माना और उसके लिए उसने वनराज को थप्पड़ भी मारा और काव्य से लड़ाई भी की, लेकिन उसने क्या किया। 

इस लिए आज से काव्य ही इस घर की बहु, बेटी, लक्मी और अन्नपूर्णा है - आज से यहीं इस घर की नयी अनुपमा है। वैसे इस डायलॉग को सुन कर काव्य को थोड़ी मिर्ची ज़रूर लगी होगी की - बा ने आखिर उसे नयी बहु कहने के बदले नयी अनुपमा कहाँ। 

वहीँ अनुज अनुपमा को दिवाली अपने नए घर में मनाने को कहता है और फिर अनुपमा का नाम उसके घर के दरवाजे पर लिखता है, यह देख कर अनुपमा बहुत खुश होती है। 

अनुज और अनुपमा दोनों बाजार की ओर जाते है और अनुज कुछ सोच रहा होता है - तभी अनुपमा उसे देख कर समझ जाती है और पूछती है की वह क्या सोच रहा है। अनुज हैरान हो जाता है की अनुपमा को कैसे पता चला, फिर वो बताता है की दिवाली के लिए इस बार अपने स्टाफ को कोई अच्छी मिठाई देना चाहता है।

अनुपमा इस पर कोई आईडिया के बारे में सोचने लगती है और इस बार अनुज को पता चल जाता है की अनुपमा कुछ सोच रही है - अनुपमा हैरान हो जाती है की अनुज को कैसे पता चला की में कुछ सोच रही हूँ।

भाई अब ये प्यार की केमिस्ट्री बहुत ही क्यूट थी - मुझे तो मज़ा आ गया।

अनुपमा बताती है की क्यों न हम उन् सभी औरतो से मिठाई बनवाये जिनको हमने होटल में शेफ के काम के लिए चुना है, इससे सभी को घर की बानी मिठाई भी मिल जायेगी और दिवाली वाले दिन उन् औरतो की कमाई भी हो जायेगी।

अनुज अनुपमा के आईडिया से बहुत खुश होता है और आईडिया को फाइनल कर देता है। तभी उनकी नज़र एक ठेले पर दिया बेचने वाली औरत पर पड़ती है। जहाँ एक आमिर औरत उससे दिया के लिए मोल भाव कर रही होती है।

अनुपमा उस औरत को सबक सिखाती है की इन् ग़रीब मेहनत करने वालों से मोल भाव न करे, अगर वो बड़े बड़े मॉल वालों से हज़ारो रुपये की खरीदी पर भी मोल भाव नहीं करती। क्यों की गरीब से उनके सामान के पैसे कम करवा कर कितना बचा लेंगे और अगर करवा भी लिया तो गरीब की मेहनत का हक्क उनको नहीं मिलेगा।

अनुपमा उस औरत के सामने ही दिया बेचने वाली से दिये खरीदती है और बाकी के पैसे उसे ही रखने को कहती है। इस पर दिये बेचने वाली अनुपमा को दूवा देती है की भगवान् हमेशा उसे खुश रखे।

अनुपमा उस आमिर औरत को ताना मारते हुए कहती है की उसने मेहेंगे में दिये नहीं ख़रीदे, बल्कि सस्ते में दूवा ख़रीदा है। वहीँ खड़ा अनुज जो ये सब देख रहा होता है, बहुत खुश होता है और मन ही मन कहता है की लोग पूछते है की तुम 26 साल से कैसे उससे प्यार कर सकते है।

में तो इससे 26 जन्म तक प्यार कर सकता हूँ। भाई ये होता है सच्चा प्यार, लेकिन अनुज कब अपनी दिल की बात अनुपमा को बताओगे। 💓

फिर अनुज भी अनुपमा को अपने घर और ऑफिस के लिए दिये खरीदने को कहता है और वो भी अनुपमा की तरह उस औरत को ज़्यादा पैसे देता है जिससे वह औरत बहुत खुश हो जाती है। लेकिन उस आमिर औरत की सिटी पित्ती गुल हो जाती है - आखिर घमंड जो चूर हो गया उसका।

वहीँ शाह हाउस में, बा सभी से कहती है की इस साल वो दिवाली बहुत ज़्यादा धूम धाम से मनाएगी और आज से कोई भी अनुपमा का नाम इस घर में नहीं लेगा। अगर गली में आते जाते अनुपमा ने कभी उससे बतमीजी करी तो वह उसे सबके सामने थप्पड़ मारेगी, की वह अनुज के घर पर जा गिरेगी।

यह सुनते ही बापूजी क्रोधित हो जाते है और कहते है की अनुपमा का नाम इस घर में लिया जाएगा, और बा ही उसका नाम लेगी। जितनी नफरत आज वो अनुपमा से कर रही है उससे हज़ार गुना ज़्यादा वो अपने आप से नफरत करेगी। बा को वह दिन बहुत ही जल्द देखने मिलेगा जब वो सिसक सिसक कर अनुपमा के लिए रोयेगी।

अनुपमा और अनुज - अनुपमा के घर सारा सामान ले कर पोहोचते है और तभी वहाँ पर देविका आ जाती है और अनुपमा को गले लगा लेती है। वह कहती है की उसे अनुपमा पे और उसके फैसले पर बहुत गर्व है।

देविका जानती है की अनुपमा के लिए उसका परिवार ही उसकी पूरी दुनिया है, लेकिन फिर भी उसने यह फैसला लिया जो सराहनीये है। देविका की बात सुन कर सभी भावुक हो जाते है।

अनुज देविका और अनुपमा के इस ख़ुशी भरे पल को कमरे में कैद करने के लिए उन् दोनों सहेलियों का फोटो लेता है। इसके बाद अनुपमा देविका से वादा करती है की वह कभी भी देविका और अनुज को निराश नहीं करेगी।

शाह हाउस में, मामाजी बापूजी को दवाई देने के लिए आते है लेकिन उन्हें याद नहीं की कौनसी दवाई देनी है। बापूजी कहते है की उन्हें याद है और वो खुद दवाई ले लेंगे, क्यूंकि वो अपना सवास्थ ख़राब करके अनुपमा को दुःखी नहीं कर सकते।

दूर कड़ी बा ये सब देख रही होती है और तभी वो काव्य को कुछ भी कर के बापूजी की नाराज़गी दूर करने को कहती है। काव्य पहले तो हिचकिचाती है की अगर वनराज और बा, बापूजी को नहीं मना पाए तो में कैसे - लेकिन फिर उसे बा की बात मान कर हाँ कहना पड़ता है। 

एपिसोड समाप्त।

क्या काव्य की शैतानी चल कामयाब होगी?

क्या बा को उनकी गलतिओं का अहसाह होगा?

प्लीज अपने विचार नीचे कमैंट्स में बताये।

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