एक बूढ़े पिता की अजीब वसियतनामा - कहानी | Ek Budhe Pita Ki Ajeeb Vasiyatnama - Kahaani

एक बूढ़े पिता की अजीब वसियतनामा - कहानी | Ek Budhe Pita Ki Ajeeb Vasiyatnama - Kahaani

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एक बूढ़ा किसान अपने 17 घोड़ों को उसके 3 बेटों के लिए छोड़कर मर गया।

जब उसके पुत्रों ने वसीयत खोली तो उसमें लिखा था:

'मेरे सबसे बड़े बेटे को कुल घोड़ों का 1/2 (आधा) मिलना चाहिए;'

'मेरे दूसरे बेटे को कुल घोड़ों का 1/3 (एक तिहाई) दिया जाना चाहिए;'

'मेरे सबसे छोटे बेटे को कुल घोड़ों का 1/9वां (एक-नौवां) दिया जाना चाहिए।'

चूंकि 17 को आधा या 17 को 3 या 17 को 9 से विभाजित करना असंभव है, इसलिए तीनों बेटे आपस में लड़ने लगे।

फिर, उन्होंने एक किसान मित्र के पास जाने का फैसला किया, जिसे वे काफी स्मार्ट समझते थे, यह देखने के लिए कि क्या वह उनके लिए यह काम कर सकता है।

किसान मित्र ने वसीयत को धैर्यपूर्वक पढ़ा, और उचित विचार करने के बाद, अपने स्वयं के घोड़ों में से एक घोड़े को ले आया और इसे 17 में जोड दिया।

इससे कुल 18 घोड़े हो गए।

अब, उसने घोड़ों को उनके पिता की इच्छा के अनुसार विभाजित किया।

18 का आधा = 9, तो उसने सबसे बड़े बेटे को 9 घोड़े दिए।

18 का 1/3वां = 6, फिर उसने दूसरे बेटे को 6 घोड़े दिए।

18 का 1/9वां = 2,अंत में उसने सबसे छोटे बेटे को 2 घोड़े दिए।

अब जोड़ें कि उनके पास कितने घोड़े हैं:

बड़ा बेटा 9

दूसरा बेटा 6

सबसे छोटा बेटा 2

कुल = 17

अब 18 में से एक घोड़ा जो बच गया, जो उस किसान मित्र का था, उस घोड़े को वो अपने साथ वापस अपने खेत में ले जाता है…

इस तरह किसान मित्र अजीब वसीयतनामे को हल कर देता है।

तो दोस्तों, इस कहानी में हम सीखते हैं कि: चाहे आप कितनी भी कठिन परिस्थिति का सामना करें, हमें कभी भी लड़ना नहीं चाहिए और स्थिति को शांति से और अपनी चतुराई से समझकर उसे हल करने का प्रयास करना चाहिए।

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